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AISPA update : 17th August 2012
AISPA Update: 17th August, 2012.
Good Evening Speakasians,

मुंबई हाई कोर्ट में AISPA रिट ३६११/२०११ की सुनवाई थी और उसी को आज माननीय न्यायमूर्ति श्री अ. म. खानविलकर और माननीय न्यायमूर्ति श्री अ.र जोशी की मंडल पीठ द्वारा सुना गया.

दोनों पक्षों की सुनवाई पर माननीय मंडल पीठ ने इस मामले को ६ सितंबर २०१२ , को स्थगित किया और स्पष्ट रूप से AISPA को , माननीय सुप्रीम कोर्ट से १० मई २०१२, के अवलोकन के बारे में स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए निर्देश किया.
यदि हमें इस तरह का स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, तो अगली तारीख यानी ६ सितंबर २०१२ को , हमें मामले पर बहस करनी होगी.
मैं इस परिवार को याद दिलाता हूँ कि यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा हमें स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, हम पूरी तरह से इस मामले में हमारे दलीलों के साथ तैयार हैं.

मैं इस अद्भुत परिवार को याद दिलाना चाहता हूँ कि माननीय हाई कोर्ट के आदेश पर २४ जुलाई को AISPA ने स्पष्टीकरण के लिए आवेदन दाखिल किया था और इस बात का उल्लेख २७ जुलाई २०१२, को किया गया था और सुना गया था जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश पारित किया:

"वकील की सुनवाई पर कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश किया
०८ /०८/२०१२ पर सूची "


हम सभी जानते हैं कि ८ अगस्त को जब इस मामले को WP/३८३ /२०११ में अन्य सभी अनुप्रयोगों के साथ साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, मामले की सुनवाई नहीं हुई, और मामला अब ७ नवम्बर २०१२ के लिए सूचीबद्ध दिखाया गया है.

आज (यानी १७ अगस्त) सुबह को AISPA के वरिष्ठ वकील ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक जरूरी उल्लेख किया और माननीय न्यायालय के सामने इस मामले में चरम अत्यावश्यकता को दर्शाया.
माननीय न्यायालय ने इस तात्कालिकता की सराहना की है और IA १४ (AISPA हस्तक्षेप आवेदन) को २४ अगस्त २०१२ को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी , हस्तक्षेप आवेदन की सुनवाई और उपरोक्त स्पष्टीकरण के मांग आवेदन पर फैसला करने के लिए.

८ अगस्त २०१२ को, बहुतांश Speakasians की उम्मीदें बिखर गयी और उन्हें निराश और परेशान कर दिया.
यही वजह है कि हम विभिन्न अद्यतन के माध्यम से कहते आये हैं, कि हमें इस न्यायिक प्रक्रिया के हर एक चरण को (तारीख को) न्यायपालिका में निहित और पूरे विश्वास के साथ, लेकिन बिना कोई उम्मीद रखे , के दृष्टिकोण से देखना चाहिए.

WP/३८३ मामले के ७ नवंबर २०१२ के स्थगन के बाद, देश भर से हमपर फोन कॉल की बौछार हो गई है.

विभिन्न मंचों और ब्लॉग साइटों पर झूठी और निराधार जानकारी के प्रसार के कारण पनेलिस्ट्स और उपभोक्ताओं का विश्वास है कि WP/३८३ हमारे सभी संकट को खत्म करेगा , WP/३८३ द्वारा क्या होगा, स्पष्ट करने के लिए अनुमति दें.

.इस WP/३८३ में तीन मूल आवेदन है:
१ . पनेलिस्ट्स द्वारा कमाए गए RP 's का SAOL को भुगतान करने के लिए निर्देशित किया जाए. HVP को, ई पत्रिका नहीं प्रदान किया गए प्रत्यक्ष अवधि के लिए, सदस्यता लागत वापस करने को निर्देशित किया जाए.
२ . ऐसे निर्देश जारी किये जाए, जिससे चल रही जांच, पनेलिस्ट्स से एकत्र किये गए पैसे की वापसी में कोई अड़चन या प्रतिबंध नहीं डाल सकें.
३ . एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, ताकि लगभग १५० करोड़ जो विभिन्न अधिकारियों के साथ जब्त है, माननीय सुप्रीम कोर्ट के निरिक्षण के अधीन लाया जाए .और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे सुरक्षित संवितरण किया जाए.

उपरोक्त आवेदन को बारीकी से देखते हुए और WP/३८३ की प्रगति से, इस अद्भुत परिवार को एहसास होगा, कि आवेदन प्रति के मुताबिक़
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हमारे मामले में मध्यस्थ के रूप में न्यायमूर्ति श्री र.क.लाहोटी को नियुक्त किया है.

WP/३८३ की वर्तमान स्थिति क्या है और इस मामले में अगली सुनवाई से क्या उम्मीद है?
हमारे विश्लेषण के अनुसार अगर निम्नलिखित कुछ आवेदनों का फैसला होता हैं, तो हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात होनी चाहिए.

अ) मार्च २०१२ के आसपास, माननीय सुप्रीम कोर्ट में पेश किये , मध्यस्थ के पिछले रिपोर्ट के आधार पर, हम पनेलिस्ट्स और उपभोक्ताओं को खुश होना चाहिए अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट, EOW को आदेश करता है, दर्पण छवि को मध्यस्थ को देने के लिए, ताकि EXIT करने वाले पनेलिस्ट्स की बकाया राशि का पता लगाया जा सकें.
ब ) वो आवेदन, कि लगभग १५० करोड़, जो विभिन्न अधिकारियों द्वारा जब्त है, माननीय सुप्रीम कोर्ट के दायरे में लाया जाए.
क) वो आवेदन जो प्रार्थना करता है कि मध्यस्थ को इतना अधिकार दें, कि इस प्रक्रिया में तेज़ी ला सकें ताकि विवाद का एक जल्द और त्वरित समाधान हो.
ड) AISPA आवेदन जिसमे माननीय सुप्रीम कोर्ट के १० मई के अवलोकन का स्पष्टीकरण मांगा है.

हम एक बार फिर इस पूरे परिवार को याद दिलाना चाहते है कि हर मामला समान रूप से व्यापार के पुनः आरंभ करने के अंतिम लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है. हर एक मामले / मुकदमे का अपने आप, एक सीमित दायरा और उद्देश्य है, लेकिन विभिन्न मामलों के समन्वय से ही अंत में व्यापार का पुनः आरंभ होगा.

हमें इस मोड़ पर लगता है कि यह उचित है कि कंपनी ने RBI के खिलाफ रिट दायर किया था, जिसके तहत RBI ने शपथ दी है कि वे २ अगस्त से लेकर, ८ सप्ताह के भीतर SAOL मामला तय करेंगे, जिसका मतलब है कि उनका निर्णय १ अक्टूबर तक होना चाहिए, यानी के गांधी जयंती से १ दिन पहले. हम सभी जानते हैं, महात्मा गांधी, हमारे राष्ट्रपिता, सच का प्रतीक है.

जब इस रिट का आदेश मुंबई हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, हमने जाना कि वहाँ एक टंकण (टाइपिंग) गलती हुई थी और यह ८ सप्ताह के बजाय ८ दिन दिखा रहा था. हमारी टीम के सदस्य, उस समय कोर्ट में थे, जब इस मामले को सुना था और इसमें कोई शक नहीं है कि अदालत ने खुली अदालत में स्पष्ट किया था, कि RBI को ८ सप्ताह दिए गए थे SAOL मामला तय करने के लिए





 
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